क़ाबिज़ पश्चिमी तट में बच्चों पर बढ़ते हमले, स्कूल और घर तबाह: UNICEF की चेतावनी

पश्चिमी तट में बच्चों का बचपन हिंसा की भेंट, UNICEF ने जताई गहरी चिंता

  • ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में बच्चों पर संकट गहराया, UNICEF रिपोर्ट में भयावह तस्वीर
  • फ़लस्तीनी बच्चों के स्कूल, घर और भविष्य पर हमला: UNICEF
  • इसराइली सैन्य कार्रवाई और बस्ती हमलों में बढ़ रहे बच्चों के हताहत
  • ग़ाज़ा में हज़ारों घायल बच्चों को नहीं मिल पा रहा उपचार और पुनर्वास
UNICEF ने चेतावनी दी है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट और ग़ाज़ा में बढ़ती हिंसा का सबसे बड़ा असर बच्चों पर पड़ रहा है। स्कूल, घर और जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाएँ तबाह हो रही हैं, जबकि घायल बच्चों को उपचार और पुनर्वास तक उपलब्ध नहीं है...
  • पश्चिमी तट में बच्चों पर बढ़ते हमले और हिंसा
  • UNICEF ने क्यों जताई बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता
  • स्कूल और घर बन रहे हैं हिंसा के निशाने
  • फ़लस्तीनी बच्चों की गिरफ़्तारी और हिरासत के बढ़ते मामले
  • ग़ाज़ा में घायल बच्चों के सामने पुनर्वास का संकट
  • WHO के आँकड़ों में ग़ाज़ा की भयावह स्थिति
  • कृत्रिम अंग और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी
  • युद्ध और सैन्य कार्रवाई का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर
  • मानवीय सहायता पर प्रतिबंध और बढ़ती त्रासदी

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मानवीय और नैतिक चुनौती

पश्चिमी तट और ग़ाज़ा में जारी हिंसा ने बच्चों के जीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। UNICEF के अनुसार बच्चों की मौत, घायल होने, हिरासत और स्कूलों पर हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि हज़ारों घायल बच्चे बिना पुनर्वास सेवाओं के जीवन जीने को मजबूर हैं। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर
Childhoods on the West Coast Fall Victim to Violence; UNICEF Expresses Deep Concern
Childhoods on the West Coast Fall Victim to Violence; UNICEF Expresses Deep Concern


क़ाबिज़ पश्चिमी तट: 'बच्चों के स्कूलों, घरों व बचपन को ढहाया जा रहा है'

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइल की सैन्य कार्रवाई और इसराइली बस्तियों के निवासियों के बढ़ते हमलों में अपनी जान गँवाने वाले व घायल फ़लस्तीनी बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है और उनके जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं को ध्वस्त किया जा रहा है. उधर, ग़ाज़ा में हिंसा में घायल होने वाले हज़ारों बच्चों का जीवन पूरी तरह से बदल गया है लेकिन उनकी उपचार व पुनर्वास सेवाओं तक पहुँच नहीं है.

यूएन बाल कोष (UNICEF) के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि हम देख रहे हैं कि समन्वित ढंग से किए जाने वाले हमलों की संख्या बढ़ रही है.

“बच्चों को गोली मारने, चाकू घोंपने, बच्चों की पिटाई किए जाने और बच्चों पर मिर्ची का छिड़काव (pepper spray) करने के मामलों में जानकारी जुटाई गई है.”

यूनीसेफ़ के अनुसार, जनवरी 2025 के बाद से अब तक लगभग 70 बच्चे मारे जा चुके हैं, यानि हर सप्ताह औसतन एक मौत हुई है. 850 अन्य घायल हुए हैं, जिनमें अधिकाँश गोलीबारी की चपेट में आने से हुए हैं.

उन्होंने कहा कि ये घटनाएँ, बाल अधिकारों के हनन के बदतरीन रुझानों को दर्शाती है, जोकि निरन्तर जारी है. उनके स्कूलों, घरों, जल आपूर्ति पर हमले किए जा रहे हैं, और उस माहौल को तहस-नहस किया जा रहा है, जो उनके जीवन व पालन-पोषण के लिए आवश्यक है.

प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने बताया कि यह ऐसे समय में घटित हो रहा है जब इसराइली बस्तियों के निवासियों के हमले, ऐतिहासिक स्तर पर हैं. मार्च 2026 में, ऐसे हमलों में घायल होने वाले फ़लस्तीनियों की संख्या पिछले 20 वर्ष में अपने सबसे ऊँचे स्तर पर थी.
हमलावरों द्वारा मार-पिटाई
यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने हाल ही में पश्चिमी तट का दौरा किया है, जहाँ उनकी 8-वर्षीय एक बच्चे से मुलाक़ात हुई. इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों के हमलों के दौरान एक लकड़ी से उसकी पिटाई की गई थी. सिर पर चोट लगने की वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

बच्चे की माँ ने जब अपने 4 महीने के बच्चे को बचाने की कोशिश की, तो मार-पिटाई में उनके भी दोनों हाथ टूट गए.

जेम्स ऐल्डर ने कहा कि हमलों में छात्रों के मारे जाने, घायल होने या फिर उन्हें हिरासत में लिए जाने की घटनाएँ भी हुई हैं, और स्कूलों को ध्वस्त किया गया है.

“स्कूल, जिन्हें सुरक्षा व स्थिरता का स्थल होना चाहिए, वे अब अफ़रा-तफ़री का स्थान बनते जा रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि पश्चिमी तट में बच्चे एक सीधी रेखा में नहीं चलते हैं, चूँकि सुरक्षित महसूस न करने की वजह से वे बार-बार पीछे मुड़कर देखते हैं. उनके स्कूल तक पैदल चलने का सफ़र भी भयभीत करने वाला अनुभव हो गया है.

रिकॉर्ड संख्या में हिरासत मामले

UNICEF प्रवक्ता ने बताया कि क़ाबिज़ इलाक़े में फ़लस्तीनी बच्चों को गिरफ़्तार व हिरासत में लिए जाने के मामले बढ़े हैं. कथित तौर पर सुरक्षा सम्बन्धी आरोपों में 347 बच्चों को इसराइली सैन्य हिरासत में रखा गया है, जोकि पिछले 8 वर्षों की सबसे अधिक संख्या है.

“चिन्ताजनक बात यह है कि इनमें आधे से अधिक बच्चों, 180, को प्रशासनिक हिरासत में रखा गया है, प्रक्रियात्मक रक्षा उपायों के बिना, जिनमें नियमित क़ानूनी सलाह-मशविरा और हिरासत को चुनौती देने का अधिकार भी है.”

ग़ाज़ा में हताहत हो रहे हैं बच्चे

उधर, ग़ाज़ा में संयुक्त राष्ट्र ने अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक हिंसा में कम से कम 229 बच्चों के मारे जाने और 260 के घायल होने के मामलों में जानकारी जुटाई है.

क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) कार्यालय के अनुसार, हिंसक टकराव में बर्बाद हो चुके ग़ाज़ा में लगभग 10 हज़ार बच्चे ऐसी चोटों के साथ जी रहे हैं, जिसने उनके जीवन को बदल कर रख दिया है.

अक्टूबर 2023 में इसराइल पर हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों के आतंकी हमलों के बाद, इसराइली सेना ने ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें 1.72 लाख लोग घायल हुए.

कृत्रिम अंगों की क़िल्लत

इनमें 43 हज़ार लोगों को गम्भीर चोटें लगी हैं, उनके हाथ-पाँव, रीढ़ की हड्डी समेत अन्य अंग प्रभावित हुए हैं. अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू होने के बाद से 2.5 हज़ार लोग घायल हुए हैं.

हिंसा में अपने शरीर के अंग गँवाने वाले लोगों में से केवल एक-चौथाई को ही कृत्रिम अंग स्थाई रूप से हासिल हो पाए हैं, चूँकि ग़ाज़ा में इनकी बड़ी कमी है.

ग़ाज़ा में प्रभावितों के लिए पुनर्वास सम्बन्धी सामान की आपूर्ति रवाना की जा चुकी हैं, लेकिन 18 खेप को वहाँ प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिल पाई है. इस खेप में व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग समेत अन्य सामान लदा है, लेकिन प्रवेश के लिए 130 दिन से एक वर्ष तक की प्रतीक्षा है.

कुल मिलाकर, ग़ाज़ा में हिंसक टकराव के दौरान 50 हज़ार से अधिक चोटों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास सेवा की आवश्यकता है, लेकिन इसकी फ़िलहाल कोई व्यवस्था नहीं है.

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Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।

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