UNICEF रिपोर्ट: अमीर देशों में आर्थिक असमानता से बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा संकट में

विकसित देशों में हर पाँचवाँ बच्चा निर्धनता से जूझ रहा: UNICEF अध्ययन

  • आर्थिक विषमता बच्चों के भविष्य को कर रही प्रभावित, UNICEF ने जताई चिंता
  • OECD देशों में आय असमानता का सबसे बड़ा असर बच्चों पर: UNICEF

अमीर देशों की चमक के पीछे छिपा बाल निर्धनता का संकट: UNICEF रिपोर्ट

UNICEF की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि सम्पन्न देशों में बढ़ती आर्थिक असमानता बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक विकास को गहराई से प्रभावित कर रही है। हर पाँचवाँ बच्चा निर्धनता से जूझ रहा है, जबकि सरकारों से नीतिगत हस्तक्षेप की मांग तेज हुई है। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह खबर...
The Crisis of Child Poverty Hidden Behind the Glitter of Wealthy Nations: UNICEF Report
The Crisis of Child Poverty Hidden Behind the Glitter of Wealthy Nations: UNICEF Report

साधन-सम्पन्न देशों में आर्थिक असमानताएँ, बच्चों को पहुँचा रही है नुक़सान - UNICEF

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अपने एक नए अध्ययन में बताया है कि विश्व के सम्पन्न देशों में व्याप्त आर्थिक असमानताएँ, स्थानीय बच्चों में ख़राब शारीरिक स्वास्थ्य व शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह बन रही हैं.

यूनीसेफ़ ने अपनी इस रिपोर्ट में आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) और उच्च-आय वाले 44 देशों में, आर्थिक असमानताओं और बाल कल्याण की स्थिति की पड़ताल की है. इसके अनुसार, अधिकाँश देशों में आय असमानता की दर और बाल निर्धनता, दोनों ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं.

जिन देशों में यह अध्ययन किया गया है, वहाँ आय के मामले में शीर्ष 20 प्रतिशत घर-परिवार, निचले 20 प्रतिशत वालों की तुलना में औसतन 5 गुना से अधिक कमाते हैं. वहीं, इन देशों में लगभग हर 5 में से 1 बच्चा आय निर्धनता से जूझ रहा है, जिस वजह से उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पा रही हैं.

इटली के इनोचैंटी शहर में यूनीसेफ़ के रणनीति व साक्ष्य कार्यालय के निदेशक बो विक्टोर निलुंड ने बताया कि बच्चे किस तरह से सीखते हैं, वे क्या खाते हैं, और जीवन के बारे में क्या महसूस करते हैं, असमानता इन सभी को गहराई से प्रभावित करती है.

“असमानता के बदतरीन असर को सीमित करने के लिए, हमें सबसे वंचित समुदायों में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण व शिक्षा में जल्द से जल्द निवेश करने की आवश्यकता है.” रिपोर्ट दर्शाती है कि आर्थिक असमानता के ऊँचे स्तर और बच्चों में स्वास्थ्य के बीच स्पष्ट सम्बन्ध है.

उदाहरणस्वरूप, असमानता से सर्वाधिक प्रभावित देशों में बड़े होने वाले बच्चों का अधिक वज़न होने की सम्भावना, सबसे अधिक समानता वाले देशों की तुलना में 1.7 गुना होती है.

यह ख़राब, कम गुणवत्तापूर्ण आहार के सेवन और कभी-कभी भोजन न मिल पाने की समस्या को दर्शाती है.

शिक्षा की कमज़ोर नींव

यूनीसेफ़ रिपोर्ट के अनुसार, योरोपीय संघ के देशों में आय के मामले में निचले 20 प्रतिशत वाले परिवारों में केवल 58 प्रतिशत बच्चों का स्वास्थ्य ही अच्छा है. जबकि शीर्ष 20 फ़ीसदी परिवारों में यह 73 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में आर्थिक असमानता और शैक्षणिक प्रदर्शन के बीच सम्बन्ध को भी उजागर किया गया है. जिन देशों में धनी व निर्धन के बीच की खाई चौड़ी है, वहाँ परीक्षाओं में शैक्षणिक प्रदर्शन निम्नतर आंका गया है.

सबसे अधिक असमानता वाले देशों में, पढ़ने या गणित में बुनियादी कौशल को हासिल किए बिना ही, बच्चों के स्कूल छोड़ने की सम्भावना 65 प्रतिशत होती है, जबकि सबसे ज़्यादा समानता वाले देशों में यह आशंका 40 प्रतिशत है.

औसतन, आय के मामले में शीर्ष 20 प्रतिशत देशों के परिवारों में 15 वर्ष की आयु वाले 83 प्रतिशत बच्चों में पढ़ने व गणित का बुनियादी कौशल है, जबकि निचले 20 प्रतिशत परिवारों में यह घटकर 42 फ़ीसदी ही रह जाता है.

नीतिगत उपायों पर बल

रिपोर्ट में देशों की सरकारों और हितधारकों से अनेक नीतिगत उपाय उठाने का आग्रह किया गया है, ताकि मौजूदा असमानता से बच्चों के जीवन व उनके कल्याण पर होने वाले असर को कम किया जा सके. इसके तहत, बाल निर्धनता घटाने पर केन्द्रित उपायों पर विशेष रूप से बल दिया गया है. जैसेकि:

परिवारों व बच्चों की भलाई और न्यूनतम कमाई के लिए समर्थन उपायों को बेहतर बनाना, ताकि कोई भी बच्चा निर्धनता के साए में न रहे.
प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहे समुदायों को सब्सिडी वाले आवास मुहैया कराना, वंचित इलाक़ों में बुनियादी प्रतिष्ठानों को बेहतर बनाना, और हरित स्थलों समेत सार्वजनिक केन्द्रों में निवेश करना.
स्कूलों में सामाजिक-आर्थिक आधार पर वर्गीकरण में कमी लाकर, शिक्षण व्यवस्था में असमानता को दूर करना. स्कूलों में कर्मचारियों की उपयुक्त संख्या में नियुक्ति और वहाँ सुविधाओं की सुलभता सुनिश्चित करना, भले ही छात्र किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से हों.

बच्चों के लिए स्कूलों में स्वस्थ व पोषक आहार की व्यवस्था करना.

असमानता से होने वाले प्रभाव पर बच्चों के नज़रिए को बेहतर ढंग से समझने के लिए उनके व परिवारजन के साथ सम्पर्क व बातचीत और कल्याण के लिए समाधान विकसित करना.

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Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।

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