ग़ाज़ा युद्ध : भूख और गोलियों से अपाहिज होते लोग, बच्चों का भविष्य अंधकारमय

यूएन एजेंसियों की रिपोर्ट : ग़ाज़ा में क़तारों में लगी गोलीबारी से सैकड़ों हताहत

  • भोजन की तलाश में घायल और विकलांग हो रहे ग़ाज़ावासी
  • इब्राहीम अब्देल नबी : पैर खोकर भी परिवार के लिए जंग
  • ग़ाज़ा में अपंग होते बच्चों की दर्दनाक कहानियाँ
  • अस्पतालों में इलाज और कृत्रिम अंग की सख़्त आवश्कता

युद्ध और भूख से ग़ाज़ा का भविष्य स्याह

ग़ाज़ा में युद्ध और भूख ने लोगों का जीवन तबाह कर दिया है। भोजन की तलाश में सैकड़ों घायल हैं, अंग काटने पड़ रहे हैं, बच्चों का भविष्य संकट में है। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह खबर
UN News: एक फ़लस्तीनी बच्चा मोहम्मद हसन, जिसका एक पैर, इसराइली मिसाइल में घायल होने के बाद, काटना पड़ा है.
UN News: एक फ़लस्तीनी बच्चा मोहम्मद हसन, जिसका एक पैर, इसराइली मिसाइल में घायल होने के बाद, काटना पड़ा है.


ग़ाज़ा: युद्ध व भोजन की आस में अपने अंग खोते लोगों के सामने स्याह भविष्य

22 अगस्त 2025 शान्ति और सुरक्षा

यूएन एजेंसियों का कहना है कि ग़ाज़ा में हाल के महीनों में, भोजन हासिल करने के लिए क़तारों में लगे या रास्तों में जा रहे लोगों पर गोलीबारी में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं. बहुत से घायलों के अंग काटने पड़े हैं जिससे उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया है और एक अत्यन्त पीड़ानजक भविष्य उनके सामने है.

ग़ाज़ा के एक निवासी इब्राहीम अब्देल नबी, अपने घर से निकले तो इस उम्मीद के साथ थे कि खाद्य सामग्री की भारी कमी के हालात में, अपने परिवार के लिए कुछ भोजन का इन्तज़ाम कर सकेंगे. मगर उन्हें कोई भोजन सामग्री तो नहीं मिली, बल्कि नियति ने उन्हें ही ना केवल घायल कर दिया बल्कि हमेशा के लिए अपाहिज बना दिया.

इब्राहीम को कुछ महीने पहले उस समय गोली मार दी गई थी जब वो अपने परिवार की ख़ातिर खाद्य सहायता हासिल करने के लिए जा रहे थे. गोली लगने से उनका एक पैर बुरी तरह घायल हो गया था.

घायल होने के बाद, वह डेढ़ घंटे तक एक ही जगह पर पड़े रहे और किसी ने भी उनकी मदद करने के लिए हाथ नहीं बढ़ाया, क्योंकि लोग अपने बच्चों के लिए भोजन हासिल करने की चिन्ता में थे.

कुछ देर के बाद कुछ लोग इब्राहीम की मदद के लिए आए और उन्हें अस्पताल पहुँचाया. रफ़ाह के अल-आलम इलाक़े में स्थित रैड क्रैसेंट अस्पताल में डेढ़ महीने तक उनका इलाज हुआ और उनकी लगभग बारह सर्जरी हुईं. इस दौरान, वह कुपोषण और गम्भीर एनीमिया से पीड़ित रहे.

उनके पैर में बार-बार संक्रमण होने के कारण, डॉक्टरों को उनकी जान बचाने की ख़ातिर, उनका पैर काटना पड़ा. अब वह एक कृत्रिम पैर के सहारे चलते हैं और फिर से भोजन की तलाश में भटकते हैं.

इब्राहीम ने, दक्षिणी ग़ाज़ा के अल-मवासी इलाक़े में यूएन न्यूज़ के साथ बात करते हुए बताया कि जिस दिन वह घायल हुए थे, उन्हें बताया गया था कि ग़ाज़ा राहत संस्थान (GHF) उन लोगों को भोजन वितरित कर रहा है जो अपना पहचान पत्र दिखा सकते हैं. यह सुनकर, वह सहायता केन्द्र की ओर चल पड़े, जहाँ रास्ते में उन्हें गोली मार दी गई.
विकलांगता और मजबूरी
Photo UN News


जब इब्राहीम के भूखे बच्चे खाना माँगने लगे, तो उनके लिए अपना पैर खोने का दर्द और भी बढ़ गया. उन्होंने मजबूर होकर, अपने हाथों से ही लकड़ी का एक कृत्रिम पैर बनाया ताकि वह कम से कम अपनी पत्नी और बच्चों के लिए आटे और पानी का एक थैला तो ला सकें.

उनकी कोशिशें कामयाब रहीं और अब वह अपनी ज़रूरत के अनुसार चल-फिर सकते हैं.

इब्राहीम का कहना है कि कठिनाइयों के बावजूद, वह कृत्रिम पैर का इस्तेमाल ज़रूर करेंगे. इस समय, ग़ाज़ा में लोगों के पास न तो दवा है और न ही कोई अन्य चिकित्सा सुविधा. जब तक उनका शरीर अनुमति देता है, वह अपने परिवार के लिए कड़ी मेहनत करते रहेंगे.

उनका कृत्रिम पैर ज़्यादा मज़बूत नहीं है और इसके सहारे वह अपनी विकलांगता को मुश्किल से 20 प्रतिशत तक नियंत्रित कर पाते है. हालाँकि, वे फिर भी ख़ुश हैं कि कम से कम इसी के सहारे, फ़िलहाल उन्हें और उनके परिवार को खाना और पानी तो मिल रहा है.

हाथ-पैरों से वंचित बच्चे

ग़ाज़ा में युद्धक गतिविधियों में घायल होने वाले ऐसे बच्चों की संख्या हाल के दिनों में बहुत तेज़ी से बढ़ी है, जिन्हें अपने हाथ-पैरों से वंचित होना पड़ रहा है. इनमें से कुछ बच्चों का इलाज अल-शिफ़ा चिकित्सा परिसर में चल रहा है.

इनमें शाहद नाम की एक बच्ची भी शामिल है, जिसका बायाँ हाथ एक इसराइली हवाई हमले में शरीर से अलग हो गया.

शाहद ने यूएन न्यूज़ संवाददाता को बताया कि वह अपने घर के सामने खड़ी थी, तभी एक हवाई हमले में, बम का एक टुकड़ा उस पर गिरा और उसका हाथ शरीर से अलग हो गया. शाहद को उम्मीद है कि डॉक्टर उसे कृत्रिम हाथ लगा देंगे.

पास ही एक बिस्तर पर, मरियम नाम की एक छोटी बच्ची, दर्द से कराह रही थी. बच्ची का एक पैर कट गया है, जबकि दूसरा पैर गम्भीर रूप से घायल है. उसकी दादी ने बताया कि इसराइली हवाई हमले में उसका घर तबाह हो गया, जिसमें मरियम बुरी तरह घायल हो गई और उसका पैर काटना पड़ा.

जबकि दूसरे पैर की हड्डी जोड़ने के लिए लोहे की प्लेटें डाली गई हैं, जिससे उसे बहुत दर्द हो रहा है.

मरियम की दादी अपील करती है कि उसकी पोती को एक कृत्रिम पैर लगाया जाए और दूसरे पैर का इलाज किया जाए, जिसकी नसें भी कट गई हैं.

उसी अस्पताल में इलाज करा रहे एक बच्चे मोहम्मद हसन ने भी अपना एक पैर खो दिया है. उसने बताया कि वह खाना लेने जा रहा था, तभी रास्ते में एक मिसाइल उसकी तरफ़ आती नज़र आई.

वह उससे बचने के लिए तेज़ी से भागा, लेकिन इसी बीच मिसाइल उसके पास आकर गिरी और उसका एक पैर बुरी तरह घायल हो गया. किसी ने उसे उठाकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों को उसका घायल पैर काटना पड़ा.

ग़ाज़ा की ये आपबीतियाँ, दरअसल अनगिनत मासूम ज़िन्दगियों की चीख़ें हैं, जो युद्ध से हुई तबाही के मलबे और दुनिया के सन्नाटे में दब गई हैं.

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Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।