WHO रिपोर्ट 2026: वैश्विक राजनीति की कीमत महिलाएँ चुका रही हैं?
युद्ध और अस्थिरता का सबसे बड़ा बोझ महिलाएँ उठा रही हैं। WHO की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2023 में 1.6 लाख मातृ मौतें संकटग्रस्त देशों में हुईं। इस खबर में जानिए कि क्या वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली विफल हो रही है?
युद्ध, अस्थिरता और मातृ मृत्यु: हर 51 में 1 लड़की पर मौत का खतरा, WHO ने दी वैश्विक चेतावनी
- युद्धग्रस्त देशों में 60% मातृ मौतें
- WHO रिपोर्ट 2026 — युद्ध और मातृ मृत्यु के चौंकाने वाले आँकड़े
- 60% मातृ मौतें संकटग्रस्त देशों में ही क्यों हो रही हैं?
- 15 वर्षीय लड़कियों के लिए 51 में 1 का जोखिम — असमानता कितनी गहरी?
- मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio) — स्थिर बनाम युद्धग्रस्त देश
- लैंगिक भेदभाव, प्रवासन और सामाजिक अस्थिरता का संयुक्त प्रभाव
- UNDP, UNFPA, UNICEF और विश्व बैंक की संयुक्त तकनीकी समीक्षा
- कोलम्बिया से यूक्रेन तक — संकट में मातृ स्वास्थ्य के नवाचारी मॉडल
- क्या वैश्विक प्रगति थम चुकी है? 2000–2023 का विश्लेषण
मज़बूत प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली ही समाधान क्यों?
WHO की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 60% मातृ मौतें युद्ध और अस्थिर देशों में हो रही हैं। संकटग्रस्त क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का जोखिम 5 गुना अधिक है...
नई दिल्ली, 18 फरवरी 2026. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक हालिया रिपोर्ट (WHO Report 2026) ने एक चिंताजनक सच को उजागर किया है। युद्ध-संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में मातृ मृत्यु दर (maternal mortality in conflict zones) अब वैश्विक स्वास्थ्य संकट का केंद्रीय मुद्दा बन चुका है। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली 60 फीसदी वैश्विक मातृ मृत्यु ( global maternal deaths) युद्ध और सामाजिक-संस्थागत अस्थिरता से जूझ रहे देशों में दर्ज की गईं। केवल वर्ष 2023 में ही लगभग 1.6 लाख महिलाओं की मृत्यु उन कारणों से हुई, जिनका समय पर इलाज संभव था।
WHO की यह रिपोर्ट “Maternal mortality in fragile and conflict-affected situations: technical brief” स्पष्ट करती है कि संघर्ष, विस्थापन, स्वास्थ्य ढांचे की तबाही और लैंगिक असमानता मिलकर गर्भवती महिलाओं के लिए घातक जोखिम पैदा कर रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि, संकट और युद्ध की स्थितियाँ ऐसे हालात उत्पन्न करती हैं, जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियाँ लगातार जीवनरक्षक मातृ सेवाएँ उपलब्ध कराने में विफल हो जाती हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि युद्धग्रस्त देशों में रहने वाली महिलाओं के लिए गर्भावस्था के दौरान मातृ कारणों से मृत्यु का खतरा स्थिर देशों की तुलना में लगभग पाँच गुना अधिक है। 15 वर्षीय लड़की के जीवनकाल में मातृ मृत्यु का जोखिम कुछ संघर्ष प्रभावित देशों में 51 में 1 तक पहुँच गया है, जबकि अपेक्षाकृत स्थिर देशों में यह 593 में 1 है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके साझीदार- UNDP, UNFPA, UNICEF तथा विश्व बैंक द्वारा तैयार इस तकनीकी संक्षिप्त विश्लेषण में यह रेखांकित किया गया है कि संकट की परिस्थितियों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का ढह जाना सबसे बड़ा कारण है। अस्पतालों पर हमले, दवाओं की कमी, प्रशिक्षित दाइयों और प्रसूति विशेषज्ञों का पलायन, तथा सुरक्षित प्रसव सेवाओं की अनुपलब्धता मातृ मृत्यु दर को बढ़ा रही है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि लैंगिक भेदभाव, जातीय पहचान, प्रवासन की स्थिति और गरीबी जैसे सामाजिक निर्धारक (Social Determinants of Health) जोखिम को और गहरा करते हैं। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बाधित होती है, जिससे समय पर इलाज संभव नहीं हो पाता।
हालाँकि, कुछ देशों ने नवाचारी उपायों से आशा की किरण दिखाई है। कोलम्बिया में पारंपरिक दाइयों को प्रशिक्षित कर दुर्गम क्षेत्रों में मातृ देखभाल मजबूत की गई। इथियोपिया ने सचल चिकित्सा टीमों के माध्यम से सेवाएँ पुनर्स्थापित कीं।
रिपोर्ट बताती है कि हेती और यूक्रेन जैसे देशों में संकट के बीच भी सुरक्षित प्रसव सेवाएँ सुनिश्चित करने के प्रयास हुए।
नए एनालिसिस में हेल्थ सिस्टम की स्थिरता को मैटरनल डेथ से जोड़ा गया है। WHO Report 2026 का निष्कर्ष स्पष्ट है कि यदि वैश्विक समुदाय ने प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली, डेटा संग्रह और संकट-प्रतिरोधी (resilient) स्वास्थ्य ढाँचे में निवेश नहीं बढ़ाया, तो मातृ मृत्यु दर में गिरावट का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। मातृ स्वास्थ्य अब केवल चिकित्सा मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकार, समानता और शांति से जुड़ा प्रश्न भी है।


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