WHO अलर्ट: भारत और यूके में ‘रिकॉम्बिनेंट’ मंकीपॉक्स के नए मामले, जीनोमिक निगरानी पर ज़ोर
भारत-यूके में नए Recombinant Mpox स्ट्रेन की पहचान, WHO ने सतर्कता बढ़ाने को कहा
- WHO की पुष्टि: भारत और यूके में recombinant mpox के दो मामले
- क्लैड Ib और IIb क्या हैं? नए वायरस रूप की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि
- जीनोमिक निगरानी (Genomic Surveillance) क्यों है आवश्यक?
- पुनर्संयोजन (Recombination) की प्रक्रिया कैसे बनाती है नया स्ट्रेन
- संक्रमण फैलाव की संभावना: WHO का जोखिम आकलन
- PCR बनाम जीनोमिक अनुक्रमण (Sequencing): पहचान की चुनौती
- किन समूहों में जोखिम अधिक? WHO की चेतावनी
यात्रा और व्यापार पर रोक की आवश्यकता क्यों नहीं
WHO mpox अपडेट 2026: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत और यूनाइटेड किंगडम में recombinant mpox (मंकीपॉक्स) के दो मामलों की पुष्टि की। क्लैड Ib और IIb के जीन तत्वों से बने नए वायरस रूप पर जीनोमिक निगरानी बढ़ाने की सलाह, हालांकि वैश्विक जोखिम स्तर में कोई बदलाव नहीं। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर
WHO: भारत और यूके में मंकीपॉक्स वायरस के नए मामले, निगरानी पर बल
16 फरवरी 2026 स्वास्थ्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि मंकीपॉक्स के दो ज्ञात आनुवंशिक तत्वों से बने एक नए वायरस (recombinant mpox) की पहचान के मद्देनज़र, लगातार जीनोमिक निगरानी किया जाना ज़रूरी है. हालाँकि, संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नए मंकीपॉक्स वायरस की पहचान के बावजूद, वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम के आकलन में फ़िलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानि कोई नया जोखिम नहीं उत्पन्न हुआ है.
ग़ौरतलब है कि जीनोमिक निगरानी का मतलब किसी वायरस या जीव के पूरे आनुवंशिक ढाँचे (DNA या RNA) में होने वाले बदलावों पर लगातार नज़र रखना होता है.
WHO ने पुष्टि की है कि अब तक recombinant मंकीपॉक्स वायरस (MPXV) के रूप के दो मामले सामने आए हैं. वायरस का यह नया प्रकार, MPXV के क्लैड Ib और IIb के जीनोमिक तत्वों से मिलकर बना है.
इनमें से एक मामला यूनाइटेड किंगडम और दूसरा भारत में दर्ज किया गया है. दोनों मरीज़ों का हाल में यात्रा का इतिहास रहा है, हालाँकि इनमें से किसी भी मरीज़ में, गम्भीर बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए.
WHO ने बताया कि इन मरीज़ों के सम्पर्क में आए लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद, संक्रमण दीगर फैलने के कोई मामले सामने नहीं आए हैं.
संगठन ने, इन दोनों मामलों और सम्बन्धित देशों की प्रतिक्रियाओं पर भी विस्तृत जानकारी जारी की है.
WHO के अनुसार, पुनर्संयोजन (Recombination) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो तब होती है जब दो सम्बन्धित वायरस एक ही व्यक्ति को संक्रमित करते हैं और अपने जीन या आनुवंशिक तत्व, एक-दूसरे के साथ बदलते हैं, जिससे एक नया वायरस रूप (variant) बनता है.
जीनोमिक जाँच से मालूम हुआ है कि दोनों व्यक्ति कुछ सप्ताह के अन्तराल पर, एक ही recombinant वायरस-रूप से संक्रमित हुए.
इससे संकेत मिलता है कि ऐसे और भी मामले हो सकते हैं, जो अभी सामने नहीं आए हैं.
फैलने की सम्भावना
ब्रिटेन (UK) में, यह मामला दिसम्बर 2025 में, एक यात्री के एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के किसी देश से लौटने पर सामने आया. शुरुआती जाँच में वायरस को क्लैड Ib के रूप में पहचाना गया, लेकिन पूरी जीनोम जाँच (whole genome sequencing) में पता चला कि इसमें क्लैड Ib और क्लैड IIb दोनों के आनुवंशिक हिस्से मौजूद हैं.
और, दोबारा लैब जाँच ने इस बात की पुष्टि की और दिखाया कि यह वायरस अपने रूप गढ़ने यानि अपनी उत्पत्ति करने में सक्षम है और इसमें आगे संक्रमण फैलाने की सम्भावना निहित है.
इस वायरस-प्रकार का पहला मामला अब तक भारत में ही दर्ज किया गया है.
WHO ने कहा कि “अब तक पाए गए मामलों की संख्या कम होने के कारण, रिकॉम्बिनेंट स्ट्रेन से mpox के फैलाव या नैदानिक विशेषताओं के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी. इस घटनाक्रम पर सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है.”
दोनों मामलों में लक्षण सामान्य mpox संक्रमण के अनुरूप पाए गए.
जोखिम में कौन है?
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि वैश्विक जोखिम का स्तर अब भी वही है. नए यौन साथी बनाने वाले या अनेक साथी रखने वाले पुरुष और यौनकर्मियों में जोखिम का स्तर मध्यम है, जबकि आम लोगों में जोखिम का स्तर निम्न है.
WHO ने चेतावनी दी है कि केवल PCR परीक्षण से रिकॉम्बिनेंट MPXV स्ट्रेन की सही पहचान नहीं हो सकती, इसलिए जीनोमिक अनुक्रमण (Sequencing) ज़रूरी है.
सभी देशों को सतर्क रहने, निगरानी, अनुक्रमण, जोखिम वाले समूहों का टीकाकरण और संक्रमण नियंत्रण उपाय जारी रखने की सलाह दी गई है.
WHO ने कहा कि फ़िलहाल किसी यात्रा या व्यापार पर रोक लगाए जाने की ज़रूरत नहीं है.


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