स्कूली बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदतें: WHO के नए दिशानिर्देश और वैश्विक पोषण संकट की चुनौती
स्कूल और पोषण: बच्चों के जीवन की बुनियाद
- WHO के नए दिशानिर्देश: पहली बार वैश्विक पहल
- स्कूलों में मिलने वाला भोजन और सीखने-सिखाने पर असर
- मोटापा बनाम अल्पपोषण: बच्चों की सेहत का दोहरा संकट
- 2025 का मोड़: बच्चों में मोटापे के मामलों में उछाल
- डायबिटीज़ और बदलती खाद्य आदतें: WHO की चेतावनी
- शुगर, नमक और अस्वस्थ वसा पर नियंत्रण की ज़रूरत
- अधिक दालें, फल और साबुत अनाज: स्वस्थ आहार की दिशा
- स्कूल परिवेश और भोजन का चुनाव: नीतिगत हस्तक्षेप क्यों ज़रूरी
नीति से अमल तक: सदस्य देशों के लिए WHO का सहयोग
5 फरवरी 2026. WHO ने स्कूली बच्चों में स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो मोटापा, अल्पपोषण और डायबिटीज़ की चुनौती पर केंद्रित हैं। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर...
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| Healthy eating habits among schoolchildren: WHO's new guidelines and the challenge of the global nutrition crisis. |
स्कूली बच्चों में खान-पान की स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने पर बल
विश्व भर के स्कूलों में, बच्चों के लिए स्वस्थ व पोषणयुक्त भोजन प्रदान करने के इरादे से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि वे अपने जीवन में खान-पान की स्वस्थ आदतों को विकसित कर सकें.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहली बार जारी की गई ये गाइडलाइन्स, तथ्य-आधारित नीतियों के लिए सुझाव हैं. इनसे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि स्कूलों में स्वस्थ आहार के ज़रिए बच्चे अपने जीवन में खान-पान की सेहतमन्द आदतों को विकसित कर सकें.
संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को जैसा भोजन मिलता है और जिस तरह के परिवेश में उनका खान-पान तय होता है, उसका उनके सीखने-सिखाने, जीवन-पर्यन्त स्वास्थ्य व कल्याण पर गहरा असर हो सकता है.
इसके मद्देनज़र, यह पहली बार है जब यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अपने ये दिशानिर्देश जारी किए हैं.
एक अनुमान के अनुसार, 46 करोड़ से अधिक बच्चों को स्कूलों में भोजन मुहैया कराया जाता है, लेकिन उन्हें दिए जाने वाले भोजन की पोषण व गुणवत्ता के बारे में अक्सर सीमित जानकारी होती है.
विश्व भर में बच्चों में आवश्यकता से अधिक वज़न, मोटापा के मामलों में उछाल आ रहा है, जबकि अल्पपोषण भी एक बड़ी चुनौती के रूप में बरक़रार है.
वर्ष 2025 में पहली बार ऐसा हुआ कि बच्चों में कम वज़न के मामले, उनमें मोटापे के मामलों से पीछे रह गए.
स्कूली उम्र व किशोरावस्था में हर 10 में से 1 बच्चा, पिछले वर्ष मोटापे की अवस्था में जीवन गुज़ार रहा था, जबकि हर 5 में से 1 बच्चा (39.1 करोड़) का वज़न अधिक था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में 80 करोड़ से अधिक लोग और हर 6 में से 1 गर्भावस्था, अब मधुमेह (डायबिटीज़) की चपेट में है.
अक्टूबर 2025 तक, 104 देशों के पास सेहतमन्द स्कूली भोजन के लिए नीतियाँ थी, लेकिन केवल 48 देशों में ही शुगर, नमक और अस्वस्थ वसा की ऊँची मात्रा वाले खाद्य पदार्थों के प्रचार को रोकने के लिए नीतियाँ हैं.
बड़ी संख्या में जो बच्चे अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूल में गुज़ारते हैं, वहाँ खान-पान की आदतें, जीवन में आहार की प्राथमिकताएँ तय कर सकती है.
अधिक दालें, कम शुगर
WHO प्रमुख के अनुसार, स्कूलों में पोषण को सुनिश्चित करना, जीवन में बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ वयस्कों को तैयार करने के नज़रिए से अहम है.
यूएन एजेंसी ने अपनी सिफ़ारिशों में कहा है कि शर्करा (शुगर), संतृप्त वसा, सोडियम की मात्रा को सीमित किया जाना होगा, जबकि साबुत अनाज, फल, सूखे मेवे और दालों को अधिक मात्रा में शामिल करना होगा.
यह ज़रूरी है कि स्वस्थ भोजन व पेय पदार्थों की उपलब्धता को बढ़ाया जाए और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों में कमी लाई जाए.
इसके अलावा, खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, उनकी मात्रा, दुकानों में उन्हें रखने की जगह में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चे अपने लिए स्वस्थ विकल्पों को चुन सकें.
यूएन एजेंसी ने कहा है कि सदस्य देशों के लिए तकनीकी सहायता, ज्ञान के आदान-प्रदान, और अन्य प्रकार के सहयोग को सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि इन दिशानिर्देशों को अमल में लाया जा सके.
Today, an estimated 466 million children receive school meals globally, yet there is limited information about the nutritional quality of the food they are served https://t.co/5PmMNgchC1 pic.twitter.com/wLsb8BJpN8
— World Health Organization (WHO) (@WHO) January 27, 2026


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