पश्चिमी तट में ‘भूमि पंजीकरण’ पर विवाद: इसराइल के फैसले की संयुक्त राष्ट्र ने की कड़ी निन्दा

क्षेत्र-C में भूमि को ‘सरकारी सम्पत्ति’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू: पश्चिमी तट पर इसराइल के कदम से दो-राष्ट्र समाधान पर संकट

  • क्षेत्र-C में भूमि पंजीकरण: इसराइली मंत्रिमंडल के फैसले का अर्थ
  • संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया: एंतोनियो गुटेरेश और स्तेफ़ान दुजैरिक का बयान
  • फ़लस्तीनियों की बेदख़ली और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सवाल
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और ‘ग़ैरक़ानूनी कब्ज़े’ की बहस
  • यहूदी बस्तियाँ, क्षेत्र A और B: नियंत्रण विस्तार की आशंका
  • दो-राष्ट्र समाधान पर मंडराता संकट
  • ग़ाज़ा में मानवीय सहायता: OCHA की चेतावनी और ज़मीनी बाधाएँ

क्षेत्रीय स्थिरता और शान्ति प्रक्रिया का भविष्य

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिमी तट के क्षेत्र-C में इसराइल द्वारा भूमि पंजीकरण फिर शुरू करने के निर्णय की निन्दा की। यूएन के अनुसार इससे फ़लस्तीनियों की बेदख़ली और दो-राष्ट्र समाधान पर गंभीर असर पड़ सकता है। ग़ाज़ा में मानवीय सहायता पर भी बाधाएँ जारी... पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह खबर...
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस


पश्चिमी तट में इज़राइल द्वारा 'भूमि पंजीकरण' फिर शुरू किए जाने की निन्दा

16 फरवरी 2026 शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने, इज़राइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र - पश्चिमी तट के एक बड़े हिस्से में, भूमि के सरकारी सम्पत्ति के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया, फिर शुरू किए जाने के निर्णय की निन्दा की है.

यह घटनाक्रम मई 2025 में, इसराइली मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए एक निर्णय पर अमल किए जाने से उत्पन्न हुआ है, जो पश्चिमी तट के क्षेत्र-C पर लागू होता है. इसमें पश्चिमी तट का लगभग 60 प्रतिशत इलाक़ा शामिल है.

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने, सोमवार को न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में बताया कि रविवार को इसराइली कैबिनेट ने मई 2025 के निर्णय पर अमल किए जाने को स्वीकृत किया है.

अगर इस निर्णय पर अलम जारी रखा गया तो, 1967 में पश्चिमी तट पर इज़राइल द्वारा क़ब्ज़ा किए जाने के बाद यह पहली बार होगा जब इज़राइल वहाँ ज़मीन को सरकारी सम्पत्ति के रूप में पंजीकृत करने लगेगा.

फ़लस्तीनियों की बेदख़ली का जोखिम



संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने पत्रकारों को बताया कि इसराइली निर्णय से, फ़लस्तीनियों को उनकी सम्पत्ति से बेदख़ल किए जाने का रास्ता खुल सकता है, और इससे पश्चिमी तट के उस इलाक़े में, इसराइली नियंत्रण का विस्तार होने का भी जोखिम है.

प्रवक्ता ने कहा, “इस तरह के उपाय, और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में इज़राइल की लगातार मौजूदगी, ना केवल अस्थिरता पैदा करने वाले कारक हैं, बल्कि, जैसाकि अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने निर्धारित किया है, ग़ैरक़ानूनी भी हैं.”

स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि महासचिव ने इज़राइल सरकार से, उन उपायों को तुरन्त पलट देने का आहवान किया है.

उन्होंने साथ ही आगाह भी किया है कि धरातल पर मौजूदा गतिविधियाँ, इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के दरम्यान दो राष्ट्र की स्थापना के समाधन की सम्भावनाओं को धूमिल कर रही हैं.

यहूदी बस्तियों का विस्तार अवैध



पिछले सप्ताह इसराइली कैबिनेट ने ऐसे उपायों को स्वीकृत किया था जो, पश्चिमी तट के ए और बी इलाक़ों में, इज़राइल के सिविल प्राधिकारों में वृद्धि करेंगे. ये दोनों इलाक़े मिलकर, पश्चिमी तट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं.

प्रवक्ता ने कहा, “महासचिव ने दोहराया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में तमाम यहूदी बस्तियाँ और उनसे सम्बन्धित गतिविधियों और प्रक्रियाओं का कोई क़ानूनी आधार नहीं है, और ये अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व संयुक्त राष्ट्र के सम्बन्धित प्रस्तावों का खुला उल्लंघन करती हैं.”

यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से, बातचीत के ज़रिए, दो राष्ट्र की स्थापना के समाधान का रास्ता सुरक्षित रखने का आग्रह किया है, “जोकि दीर्घकालीन शान्ति के लिए एक मात्र मार्ग है.”

ग़ाज़ा में सहायता पर प्रतिबन्ध जारी

इस बीच ग़ाज़ा में मानवीय सहायता एजेंसियों ने, खाद्य और आश्रय सामग्री, स्वास्थ्य, पानी व स्वच्छता सामान के 1,900 विशाल पैकेट, सीमा चौकियों से, ग़ाज़ा पट्टी में पहुँचाने में मदद की है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत समन्वय कार्यालय – OCHA ने बताया है कि इसके बावजूद, सहायता अभियानों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा है.

जॉर्डन से आने वाले सहायता क़ाफ़िलों को ऐसे मार्गों के लिए सीमित रखा गया है जहाँ पर सामान को वाहनों से कई बार उतारना और फिर चढ़ाना पड़ता है.

मिस्र की तरफ़ से आने वाले जो सहायता क़ाफ़िले कैरेम शेलॉम/कैरेम अबू सलेम सीमा चौकियों से दाख़िल होते हैं, उन्हें बड़ी संख्या में वापिस लौटाया जा रहा है. 4 से 10 फ़रवरी की अवधि में ऐसे 60 प्रतिशत सहायता क़ाफ़िलों का सामान वाहनों से उतरवा दिया गया था.

ग़ौरतलब है कि ग़ाज़ा के भीतर जिन मानवीय सहायता गतिविधियों के लिए, इसराइली अधिकारियों के साथ सामंजस्य की आवश्यकता होती है, उनमें भी अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

टिप्पणियाँ

लेबल

ज़्यादा दिखाएं
मेरी फ़ोटो
Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।

यूएन समाचार - वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां