यूक्रेन युद्ध: कड़ाके की ठंड और ऊर्जा हमलों के बीच 3.25 लाख लोगों के फिर विस्थापन का खतरा

यूक्रेन में दोहरी मार—जंग और जमा देने वाली ठंड; IOM ने लाखों के पुनः विस्थापन की चेतावनी दी

  • चार वर्ष का युद्ध और ऊर्जा ढांचे पर हमले
  • IOM की चेतावनी: 3.25 लाख लोगों के पुनः विस्थापन का जोखिम
  • आंतरिक विस्थापन के ताज़ा आँकड़े: 37 लाख लोग अब भी बेघर
  • लौटे हुए नागरिकों की नई चुनौती: घर, हीटिंग और बिजली का संकट
  • -20°C तापमान में जीवन: सर्दी ने बढ़ाई मानवीय मुश्किलें
  • मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक दबाव का बढ़ता संकट
  • ग़ाज़ा नहीं, यूक्रेन: यूरोप का जारी शरणार्थी परिदृश्य

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील: तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक पुनर्बहाली

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने चेताया है कि युद्ध और ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बीच यूक्रेन में 3.25 लाख लोग फिर विस्थापित हो सकते हैं। -20°C तापमान, ठप बिजली और सीमित हीटिंग ने मानवीय संकट गहरा दिया है। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर
Ukraine war: 325,000 people face renewed displacement amid bitter cold and energy strikes
Ukraine war: 325,000 people face renewed displacement amid bitter cold and energy strikes


यूक्रेन: कड़ाके की ठंड में दोहरी मार, लाखों नागरिकों के फिर विस्थापित होने की आशंका

16 फरवरी 2026 प्रवासी और शरणार्थी

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने युद्धग्रस्त यूक्रेन में आगामी महीनों में उन 3.25 लाख यूक्रेनी नागरिकों के फिर से विस्थापित होने की आशंका जताई है, जिन्होंने कुछ समय पहले ही अपने घरों, शहरों में वापसी की थी.

रूसी सैन्य बलों द्वारा 24 फ़रवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर आक्रमण किए जाने से शुरू हुआ युद्ध जल्द ही अपने पाँचवे वर्ष में प्रवेश कर रहा है.

पिछले कुछ महीनों में, कठोर सर्दी के मौसम में यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को सिलसिलेवार हमलों में निशाना बनाया गया है, जिससे लाखों बेहद कठिन परिस्थितियों में बिना तापन व्यवस्था (heating), बिजली आपूर्ति के ही जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं.

जनवरी 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार, यूक्रेन में फ़िलहाल 37 लाख लोग देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हैं. पहले विस्थापन का शिकार रहे 44 लाख से अधिक लोगों ने यूक्रेन के दूसरे हिस्सों से अपने घरों या अन्य देशों से यूक्रेन में वापसी की है.

मगर, यूक्रेन में वापसी करने वाले सभी लोग अनुकूल व्यवस्था न होने की वजह से अपने घर लौट पाने में समर्थ नहीं हैं और अब भी विस्थापित हैं.

यूएन प्रवासन संगठन की महानिदेशक ऐमी पोप ने बताया कि चार वर्षों के युद्ध के बाद, केवल सहनसक्षमता से ही परिवारों का गुज़ारा नहीं चल सकता है, जब उन्हें ठप बिजली आपूर्ति, जमा देने वाले तापमान से भी जूझना पड़ रहा है.

“सुरक्षित घर, भरोसेमन्द बिजली और अति-आवश्यक सेवाएँ कोई विलास सुविधाएँ नहीं हैं, वे लोगों की सुरक्षा, गुज़र-बसर और गरिमा की बुनियाद में हैं.”

“निरन्तर समर्थन के अभाव में, ऊर्जा व्यवधान से परिवारों के एक बार फिर जबरन बेघर होने का जोखिम है और बड़ी मुश्किल से लौटने वाले लोगों के लिए कठिनाई उपजने का भी.”

फिर विस्थापन का जोखिम

यूएन एजेंसी के अनुसार, इन परिस्थितियों में आने वाले महीनों में 3.25 लाख लोगों के फिर से विस्थापित होने का जोखिम है, जिनमें से 1 लाख लोग अन्य देशों में जाने पर विचार कर रहे हैं.

IOM ने बताया कि ये इरादा दर्शाता है कि विकट परिस्थितियों, असुरक्षा, क्षतिग्रस्त घर और बिजली व हीटिंग की सीमित उपलब्धता में इन परिवारों पर कितना दबाव है.

यूएन प्रवासन एजेंसी ने विस्थापन रोकने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि सर्दी के मौसम के अनुरूप राहत का स्तर बढ़ाय जाना होगा, घरों की मरम्मत, आजीविका के लिए समर्थन के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य व मनोसामाजिक सेवाओं की व्यवस्था की जानी होगी.

यह विशेष रूप से लड़ाई के अग्रिम मोर्चे वाले या उन इलाक़ों के लिए अहम है, जहाँ बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिकों ने वापसी की है. संगठन ने चेतावनी दी है कि समय पर पर्याप्त सहायता के अभाव में बिजली व ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से विस्थापन मामले बढ़ेंगे और पुनर्बहाली प्रयास कमज़ोर होंगे.

सर्दी ने बढ़ाई मुश्किलें

यूक्रेन में सर्दी के मौसम में तापमान शून्य से 20 डिग्री तक नीचे (-20°C) लुढ़क रहा है और देश भर में बिजली आपूर्ति ठप होने से आपात स्थिति है.

यूक्रेन में सर्दी के मौसम के दौरान विशाल आवश्यकताएँ उपजी हैं: उपकरण चार्ज करने के लिए पावर बैंक, जनरेटर, घर की मरम्मत के लिए सामान की क़िल्लत है.

लड़ाई के अग्रिम मोर्चे वाले इलाक़ों में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों की आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पा रही हैं. हाल के दिनों में वापसी करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं, जिनमें गम्भीर मनोसामाजिक दबाव और संकट जैसी स्थिति से जूझना पड़ रहा है.

वर्ष 2022 के बाद से अब तक, IOM ने यूक्रेन संकट के दौरान देश भर में 69 लाख ज़रूरतमन्द लोगों तक किसी न किसी रूप में मदद पहुँचाई है. पड़ोसी देशों में भी लाखों लोगों को सहायता प्रदान की गई है.

यूक्रेन में मौजूदगी, डेटा व विश्लेषण और 120 से अधिक राष्ट्रीय व क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर, लाखों यूक्रेनी नागरिकों के लिए जीवनरक्षक सहायता के साथ-साथ दीर्घकालिक जीवन-व्यापन के लिए भी समाधान मुहैया कराए जा रहे हैं.

 

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Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।

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