सूडान: अल फ़शर में नरसंहार टाला जा सकता था, अंतरराष्ट्रीय समुदाय विफल रहा – मानवाधिकार उच्चायुक्त
अल फ़शर में अत्याचार: RSF के क़ब्ज़े के बाद क्या हुआ?
- संयुक्त राष्ट्र का खुलासा: 140 से अधिक पीड़ितों की गवाही
- सामूहिक हत्याएँ, बलात्कार और जातीय निशाना—प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही
- ICC की पुष्टि: अल फ़शर में युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध
- अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप क्यों ज़रूरी है? हथियार प्रतिबंध की माँग
- सूडान का बढ़ता मानवीय संकट: 3 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित
कोर्दोफ़ान में लड़ाई और ड्रोन युद्ध: नए अत्याचारों की आशंका
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने साफ कहा है कि सूडान के अल फ़शर में हुए भीषण अत्याचार टाले जा सकते थे। उन्होंने RSF पर नरसंहार और युद्ध अपराधों का आरोप लगाया। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर...
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| Sudan: The massacre in Al Fasher was avoidable, the international community failed – High Commissioner for Human Rights |
सूडान: अल फ़शर में हुई भयावह घटनाओं को टाला जा सकता था - मानवाधिकार उच्चायुक्त
9 फरवरी 2026 शान्ति और सुरक्षा
सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव और रक्तपात का अन्त करने के लिए यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो देश में हालात और बिगड़ने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने जिनीवा में मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष अक्टूबर में अल फ़शर शहर में बड़े पैमाने पर अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की घटनाओं को रोका जा सकता था.
सूडान के उत्तर दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर पर अर्द्धसैनिक बल (RSF) द्वारा अक्टूबर 2025 में क़ब्ज़ा कर लिए जाने के बाद, वहाँ बड़े पैमाने पर अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए थे.
उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सूडान में आपात स्थिति पर सोमवार को मानवाधिकार परिषद की बैठक के दौरान बताया कि 140 से अधिक पीड़ितों व प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत के आधार पर उनकी टीम ने जानकारी जुटाई.
भुक्तभोगियों ने सामूहिक हत्याओं, बिना किसी सुनवाई के लोगों को मार दिए जाने, बलात्कार, यौन हिंसा, यातना, बुरे बर्ताव, हिरासत, गुमशुदगी समेत अन्य घटनाओं के बारे में बताया, जिन्हें अल फ़शर के भीतर और वहाँ से लोगों के भागते समय अंजाम दिया गया.
उच्चायुक्त टर्क के अनुसार, सामूहिक हत्याओं के सिलसिले पर विराम लगाने और आम नागरिकों के विरुद्ध युद्ध अपराधों को रोकने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का हस्तक्षेप ज़रूरी है.
उन्होंने कहा कि देश में हथियारों के प्रवाह को रोकने के लिए क़दम उठाए जाने आवश्यक हैं, और दारफ़ूर क्षेत्र में हथियारों पर लगाए गए प्रतिबन्धों को पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता है.
सूडान की सशस्त्र सेना और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) के बीच अप्रैल 2023 में, देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था.
पिछले वर्ष 26 अक्टूबर को, RSF ने उत्तर दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर पर, 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद, अपना क़ब्ज़ा किया, जहाँ बड़े पैमाने पर विस्थापन और अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए. इसके बाद लड़ाई अब कोर्दोफ़ान क्षेत्र में केन्द्रित हो गई है.
सामूहिक हत्याएँ
मानवाधिकार मामलों के प्रमख ने भुक्तभोगियों की व्यथा को साझा करने हुए मौजूदा स्थिति पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया.
“एक भयावह मामले में, अलग-अलग स्थानों पर भागने वाले लोगों ने हज़ारों किलोमीटर का सफ़र तय किया, लेकिन उन्होंने अल फ़शर युनिवर्सिटी में शरण लेने वाले सैकड़ों लोगों की सामूहिक हत्याओं का वैसे ही वर्णन किया.”
उच्चायुक्त टर्क ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि कुछ पीड़ितों को उनकी ग़ैर-अरब जातीयता के आधार पर निशाना बनाया गया, विशेष रूप से ज़ग़अवा जातीय समूह के लोगों को.
इस संहार में जीवित बचे लोगों ने अल फ़शर की सड़कों पर शवों के ढेर दिखाई देने की बात कही, जिसे एक व्यक्ति ने क़यामत के दिन का सामना करने जैसा अनुभव बताया.
इससे पहले, पिछले महीने, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा था कि अल फ़शर में युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराधों को अंजाम दिया गया.
OHCHR प्रमुख के अनुसार, “हमारी अपनी जानकारी” ICC के आकलन के साथ पूर्ण रूप से मेल खाती है.
गम्भीर चेतावनी
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय ने पहले भी, अप्रैल 2025 में विस्थापित लोगों के लिए ज़मज़म शिविर में RSF के हमलों के दौरान, अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के प्रति आगाह किया था.
“इन अत्याचार अपराधों की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से RSF, उसेक सहयोगी बलों और समर्थकों की है.”
इस टकराव की वजह से देश एक गहरे मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिससे 3 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं. अनेक लोग बार-बार विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं जबकि अन्य अकाल, सामूहिक बलात्कार समेत व्यवस्थागत यौन हिंसा की चपेट में हैं.
दारफ़ूर से दूर अब कोर्दोफ़ान क्षेत्र में लड़ाई जारी है और पर्यवेक्षकों ने चिन्ता जताई है कि और अधिक संख्या में अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की आशंका है. दोनों पक्षों द्वारा अत्याधुनिक ड्रोन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
पिछले दो सप्ताह में, सूडान की सशस्त्र सेना और सहयोगी बलों ने कोर्दोफ़ान के कडूग्ली और डिलिंग शहरों की घेराबन्दी को तोड़ा है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा ड्रोन हमले किए जा रहे हैं, जिनमें आम लोग हताहत हो रहे हैं.
इसके मद्देनज़र, उच्चायुक्त टर्क ने रक्तपात पर विराम लगाने के लिए सिलसिलेवार क़दमों की घोषणा की है, जिनमें मध्यस्थता प्रयासों, हिंसा में कमी लाने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.


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