गैस्ट्रोपेरेसिस क्या है? | धीमे पाचन की बीमारी को समझना

गैस्ट्रोपेरेसिस क्या है

  • धीमा पाचन क्यों होता है
  • गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण
What is gastroparesis? | Understanding the slow digestion disorder
What is gastroparesis? | Understanding the slow digestion disorder


खाना खाने के बाद पेट का भारी रहना, थोड़ी-सी मात्रा में ही पेट भर जाना, मतली या उल्टी—अक्सर लोग इन्हें साधारण गैस या अपच मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो यह गैस्ट्रोपेरेसिस (gastroparesis in Hindi) नाम की बीमारी का संकेत हो सकते हैं।

गैस्ट्रोपेरेसिस में पेट सामान्य गति से खाना आगे नहीं भेज पाता। यानी पेट खाली होने की प्रक्रिया असामान्य रूप से धीमी हो जाती है। इसका असर न सिर्फ पाचन पर पड़ता है, वरन् पोषण, ऊर्जा और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का एक मासिक न्यूज़लेटर "NIH न्यूज़ इन हेल्थ", जो अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग का हिस्सा है, के दिसंबर अंक में गैस्ट्रोपेरेसिस के बारे में विस्तार से बताया गया है। नीचे इस न्यूज़लेटर में दी गई प्रमुख बातें बताई गई हैं...

धीमे पाचन को समझना

सामान्य परिस्थितियों में पेट खाने को पीसकर छोटी आंत की ओर भेजता है। इसमें लगने वाला समय भोजन की मात्रा, फैट और कैलोरी पर निर्भर करता है। फैटी और भारी भोजन अपेक्षाकृत धीरे पचता है। लेकिन गैस्ट्रोपेरेसिस में यह प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के ही धीमी हो जाती है।

डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी का पता सिर्फ लक्षणों से नहीं चलता। असली जांच यह देखने से होती है कि पेट कितनी तेजी से खाली हो रहा है।

"मरीज यह कहकर नहीं आते कि उन्हें गैस्ट्रिक डिले है। वे लक्षणों के साथ आते हैं।" इन लक्षणों में मतली या उल्टी, जल्दी पेट भर जाना, और पेट में दर्द या बेचैनी शामिल हो सकते हैं। जब बाकी सभी टेस्ट नेगेटिव आते हैं और मरीज़ को फिर भी शिकायतें होती हैं, तो इससे गैस्ट्रोपेरेसिस की संभावना बढ़ जाती है।”

- डॉ. ब्रैडेन कुओ (कोलंबिया यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क प्रेस्बिटेरियन में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चीफ)

गैस्ट्रोपेरेसिस के प्रमुख लक्षण

गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षण व्यक्ति-विशेष में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:
  • बार-बार मतली या उल्टी
  • थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना
  • पेट में दर्द या बेचैनी
  • पेट फूलना
  • वजन कम होना
  • कमजोरी और थकान
विशेषज्ञों के अनुसार, गैस्ट्रोपेरेसिस वाले लगभग 10 में से 9 लोगों को पेट दर्द की शिकायत होती है, और कई मामलों में यह दर्द गंभीर स्तर तक पहुंच सकता है।

गैस्ट्रोपेरेसिस के कारण

गैस्ट्रोपेरेसिस के अधिकतर मामलों को इडियोपैथिक कहा जाता है, यानी उनके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता। फिर भी कुछ स्थितियां इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. अनियंत्रित डायबिटीज
डायबिटीज गैस्ट्रोपेरेसिस का सबसे आम ज्ञात कारण है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से नसों को नुकसान पहुंचता है, खासकर वेगस नर्व को, जो दिमाग और पेट के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करती है।
2. वायरल संक्रमण
कुछ वायरल बीमारियों के बाद पेट की नसों को स्थायी नुकसान हो सकता है। अधिकांश लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ में मतली, उल्टी और दर्द लंबे समय तक बने रहते हैं।
3. ऑटोइम्यून बीमारियां
कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां शरीर की अपनी नसों पर हमला करती हैं, जिससे पाचन की गति प्रभावित हो सकती है।
गैस्ट्रोपेरेसिस का पता कैसे चलता है
डॉक्टर सबसे पहले पेट में रुकावट, अल्सर या सूजन जैसी अन्य बीमारियों को खारिज करते हैं। जब सभी जांचें सामान्य आती हैं और फिर भी लक्षण बने रहते हैं, तब गैस्ट्रोपेरेसिस की संभावना पर विचार किया जाता है।
पेट के खाली होने की गति मापने के लिए विशेष टेस्ट किए जाते हैं, जिनके आधार पर बीमारी की पुष्टि होती है।
नए शोध और गट-ब्रेन कनेक्शन
गैस्ट्रोपेरेसिस को बेहतर ढंग से समझने के लिए अमेरिका में गैस्ट्रोपेरेसिस क्लिनिकल रिसर्च कंसोर्टियम (GpCRC) पिछले कई वर्षों से इस बीमारी पर शोध कर रहा है।

शोध में यह सामने आया है कि इस बीमारी में सिर्फ पेट ही नहीं, बल्कि दिमाग और नसों की भूमिका भी अहम है। वैज्ञानिक अब सेल लेवल पर होने वाले बदलावों, नर्व एंडिंग्स और सूजन से जुड़े कारणों की पहचान कर रहे हैं।

कुछ अध्ययनों में यह भी देखा जा रहा है कि कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकें मरीजों को लक्षणों से निपटने में मदद कर सकती हैं। यह थेरेपी गट-ब्रेन कनेक्शन को समझने और वेगस नर्व को शांत करने की तकनीक सिखाती है।

खानपान और जीवनशैली : राहत के व्यावहारिक उपाय

गैस्ट्रोपेरेसिस में सही पोषण लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कुछ बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं :
  • कम फैट और कम फाइबर वाला भोजन करें
  • थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार खाएं
  • भोजन को अच्छी तरह पकाएं और धीरे-धीरे चबाएं
  • पानी, साफ सूप और सब्जियों के जूस जैसे तरल अधिक लें
  • खाना खाने के बाद हल्की सैर करें
  • फ़िज़ी ड्रिंक्स, शराब और खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें
गैस्ट्रोपेरेसिस एक ऐसी बीमारी है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन समय पर पहचान और सही प्रबंधन से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धीमे पाचन को मामूली समस्या समझने के बजाय, अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: क्या गैस्ट्रोपेरेसिस पूरी तरह ठीक हो सकती है?

गैस्ट्रोपेरेसिस का इलाज संभव है, लेकिन कई मामलों में यह एक लंबे समय तक चलने वाली स्थिति हो सकती है। सही इलाज और जीवनशैली से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 2: क्या यह बीमारी जानलेवा है?

आमतौर पर नहीं, लेकिन गंभीर मामलों में कुपोषण और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

प्रश्न 3: क्या सिर्फ डायबिटीज वालों को गैस्ट्रोपेरेसिस होता है?

नहीं। डायबिटीज एक प्रमुख कारण है, लेकिन कई मामलों में बिना डायबिटीज के भी यह बीमारी हो सकती है।

प्रश्न 4: गैस्ट्रोपेरेसिस में क्या खाना पूरी तरह बंद करना पड़ता है?

नहीं। भोजन का तरीका और प्रकार बदलना होता है, पूरी तरह खाना छोड़ना समाधान नहीं है।

प्रश्न 5: कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर मतली, उल्टी, पेट दर्द या जल्दी पेट भरने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे और वजन गिरने लगे, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

(यह खबर केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। इसमें दी गई जानकारी को चिकित्सकीय सलाह के रूप में न लें। किसी भी प्रकार के उपचार, दवा, सप्लीमेंट या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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Amalendu Upadhyaya
वेबसाइट संचालक अमलेन्दु उपाध्याय 30 वर्ष से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार और जाने माने राजनैतिक विश्लेषक हैं। वह पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, युवा, खेल, कानून, स्वास्थ्य, समसामयिकी, राजनीति इत्यादि पर लिखते रहे हैं।

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